"होती नही रिहाई"उखड़ी- उखड़ी साँसें,कदम कदम रूसवाईअंग अंग को डसती अब,साँप साँप तनहाई ।
तपते जलते राहों में,कदम कदम पर धूलबूढे बूढे पेड़ों परसूखे सूखे फूल ।
टुकड़े टुकड़े आशा कीफड़ फड़ करती हँसी,ज्यों पिंजरे में कैद कोईपँख तोड़ता पंछी ।
इसी पिंजरें में बँद हैमैं और मेरी तनहाई,छटपटाते है हम दोनोंहोती नहीं रिहाई ।।"
तपते जलते राहों में,कदम कदम पर धूलबूढे बूढे पेड़ों परसूखे सूखे फूल ।
टुकड़े टुकड़े आशा कीफड़ फड़ करती हँसी,ज्यों पिंजरे में कैद कोईपँख तोड़ता पंछी ।
इसी पिंजरें में बँद हैमैं और मेरी तनहाई,छटपटाते है हम दोनोंहोती नहीं रिहाई ।।"

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