Wednesday, February 27, 2008
"तेरा चेहरा याद आया"

तेरे प्यार के रोशन च़रागों से, ज़िन्दगी का अँधेरा मिटा लूँगा,ज़हमतें आये चाहे जितनी राहों में, ज़हमतें मैं उठा लूँगा ।।मेरे दिलो-दिमाग पर नक्श तेरे प्यार का रहेगा सदा,चश्मा-ए-खूँ मे भी तेरी खातिर शौक से नहा लूँगा ।।खुशनसीबी समझूँ अपनी या समझूँ तेरी रहनुमाई,तूने मोहब्बत की मुझसे तेरी उल्फ़त में ये जहाँ लुटा लूँगा ।।मेरे लफ्ज़ों मे सजे रहेगें सदा, अल्फाज़ तेरे नाम के,'गर मौत भी भेज दी दर पर तूने, हंस के गले लगा लूँगा ।।जुस्तज़ू तेरी रहेगी हर लम्हा, मेरे इस वज़ूद को,तुझसे मिलने की चाह में कदम तूफाँ में भी चला लूँगा ।।
"दर्द अपने -अपने"जीवन संग्राम में जूझते,संघर्ष करते लोगकभी रोते कभी हँसतेकभी मर मर जीते लोग ।
कभी सीनों में धड़कतीउम्मीदों की हलचल,कभी बनते कभी टूटतेदिलों में ताजमहल ।
पत्थर जैसी परिस्थितियों केबनते रहे पहाड़भविष्य उलझा पड़ा है जैसेकाँटे- काँटे झाड़ ।
चेहरे पर अंकित अबपीड़ा की अमिट प्रथाहर भाषा में लिखी हुईयातनाओं की कथा ।
जोश उबाल और आक्रोशसीने में पलते हर दमचुप चुप ह्रदय में उतरतेसीढी सीढी ग़म ।
दर्द की सूली पर टँगाआज किसान औ' मज़दूरहै सबके हिस्से आ रहेज़ख्म और ऩासूर ।
महबूबा से बिछुड़ा प्रेमीखड़ा है शाम ढ़लेग़मों का स़हरा बाँधकरविरह की आग जले ।
कहीं निःसहाय विधवा सीठंडी ठंडी आहकहीं बवंडर से घिरी सुहागिनढूँढे अपनी राह ।
आँगन में बैठी माँ बेचारीदुःख से घिरी हर सूभूख से बच्चे रो रहेक़तरा क़तरा आँसू ।
बोझल बोझल है ज़िन्दगीटुकड़े टुकड़े सपनेयहाँ तो बस पी रहे सभीकेवल दर्द अपने अपने ।।"
कभी सीनों में धड़कतीउम्मीदों की हलचल,कभी बनते कभी टूटतेदिलों में ताजमहल ।
पत्थर जैसी परिस्थितियों केबनते रहे पहाड़भविष्य उलझा पड़ा है जैसेकाँटे- काँटे झाड़ ।
चेहरे पर अंकित अबपीड़ा की अमिट प्रथाहर भाषा में लिखी हुईयातनाओं की कथा ।
जोश उबाल और आक्रोशसीने में पलते हर दमचुप चुप ह्रदय में उतरतेसीढी सीढी ग़म ।
दर्द की सूली पर टँगाआज किसान औ' मज़दूरहै सबके हिस्से आ रहेज़ख्म और ऩासूर ।
महबूबा से बिछुड़ा प्रेमीखड़ा है शाम ढ़लेग़मों का स़हरा बाँधकरविरह की आग जले ।
कहीं निःसहाय विधवा सीठंडी ठंडी आहकहीं बवंडर से घिरी सुहागिनढूँढे अपनी राह ।
आँगन में बैठी माँ बेचारीदुःख से घिरी हर सूभूख से बच्चे रो रहेक़तरा क़तरा आँसू ।
बोझल बोझल है ज़िन्दगीटुकड़े टुकड़े सपनेयहाँ तो बस पी रहे सभीकेवल दर्द अपने अपने ।।"
"होती नही रिहाई"उखड़ी- उखड़ी साँसें,कदम कदम रूसवाईअंग अंग को डसती अब,साँप साँप तनहाई ।
तपते जलते राहों में,कदम कदम पर धूलबूढे बूढे पेड़ों परसूखे सूखे फूल ।
टुकड़े टुकड़े आशा कीफड़ फड़ करती हँसी,ज्यों पिंजरे में कैद कोईपँख तोड़ता पंछी ।
इसी पिंजरें में बँद हैमैं और मेरी तनहाई,छटपटाते है हम दोनोंहोती नहीं रिहाई ।।"
तपते जलते राहों में,कदम कदम पर धूलबूढे बूढे पेड़ों परसूखे सूखे फूल ।
टुकड़े टुकड़े आशा कीफड़ फड़ करती हँसी,ज्यों पिंजरे में कैद कोईपँख तोड़ता पंछी ।
इसी पिंजरें में बँद हैमैं और मेरी तनहाई,छटपटाते है हम दोनोंहोती नहीं रिहाई ।।"
मन सताए............अन्धेरी रात मेंसफेद लिबास मेंदुधिया रोशनी फैलातीवातावरण मधुर बनातीवह, मन सताये,मुझको सताये ।
अधरों से अपने रस बरसातीगालों की गुलाबी दर्शातीझील सी नीली आँखें टमकातीकाली घटाओं सी लट लटकातीवह, मन सताये,मुझको सताये ।
कोमल अपने कदम बढातीछम छम पायल बजातीपतली अपनी कमर लचकातीनख-शिख सौन्दर्य को दर्शातीवह, मन सताये,मुझको सताये ।
कोयल सी आवाज़ में गातीप्यारी सी मुस्कान फैलातीवातावरण में झंकार बजातीआँखों से ओझल हो जातीवह, मन सताये,मुझको सताये ।
Tuesday, February 26, 2008
दर्द के समुद्र मेंजीवन के इक मोड़ पर,जब नयी राह चलने लगेतेरी आँखों के चिरागइस दिल मे जलने लगे ।
दर्द जो तूने दिया,उसके लिये तेरा शुक्रियाअब तो अपने जिस्म मेंकई रंग घुलने लगे ।
मुरझा रहे इस पेड़ कोतूने दिया जो गंगाजल,अब तो अपने चारों तरफफूल ही फूल खिलने लगे ।
बारिशों के मौसम मेंतुम भी बरसे इस तरहपुराने ज़ख्मों के दाग सबअब धीरे धीरे धुलने लगे .
दर्द जो तूने दिया,उसके लिये तेरा शुक्रियाअब तो अपने जिस्म मेंकई रंग घुलने लगे ।
मुरझा रहे इस पेड़ कोतूने दिया जो गंगाजल,अब तो अपने चारों तरफफूल ही फूल खिलने लगे ।
बारिशों के मौसम मेंतुम भी बरसे इस तरहपुराने ज़ख्मों के दाग सबअब धीरे धीरे धुलने लगे .
शायरी
Monday, February 25, 2008
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