मन सताए............अन्धेरी रात मेंसफेद लिबास मेंदुधिया रोशनी फैलातीवातावरण मधुर बनातीवह, मन सताये,मुझको सताये ।
अधरों से अपने रस बरसातीगालों की गुलाबी दर्शातीझील सी नीली आँखें टमकातीकाली घटाओं सी लट लटकातीवह, मन सताये,मुझको सताये ।
कोमल अपने कदम बढातीछम छम पायल बजातीपतली अपनी कमर लचकातीनख-शिख सौन्दर्य को दर्शातीवह, मन सताये,मुझको सताये ।
कोयल सी आवाज़ में गातीप्यारी सी मुस्कान फैलातीवातावरण में झंकार बजातीआँखों से ओझल हो जातीवह, मन सताये,मुझको सताये ।

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