Wednesday, February 27, 2008




"बारिश थम चुकी थी‌। लेकिन कुछ बादल बिखर कर अभी भी इधर-उधर दौड़ रहे थे । मेरी तरह पागल से एक  आवारा बादल ने पहाड़ की एक सुन्दर चोटी कोअपनी बाँहों में जकड़ लिया ।आकाश की ओर ताका तो उसी पल जाऩ मूझे  तेरा ख़्याल आया। "

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